तालाब सौंदर्यीकरण के नाम पर सरकारी धन की खुली लूट!
30 लाख की योजना में घटिया निर्माण, जनता के पैसों से भ्रष्टाचार का खेल उजागर

रिपोर्ट-शकील मंसूरी
ऊंचाहार/रायबरेली। नगर पंचायत ऊंचाहार में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट का गंभीर मामला सामने आया है। नगर क्षेत्र के वार्ड संख्या चार स्थित दीवान तालाब के सौंदर्यीकरण और इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण में मानकों को ताक पर रखकर जिस तरह घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसने पूरी योजना की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात यह हैं कि काम पूरा होने से पहले ही निर्माण उखड़ने लगा है, जिससे सरकारी धन की बर्बादी साफ दिखाई दे रही है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि तालाब किनारे कराए जा रहे सौंदर्यीकरण कार्य में गुणवत्ता का पूरी तरह अभाव है। इंटरलॉकिंग बिछाने में न तो उचित गिट्टी डाली गई और न ही मजबूती का ध्यान रखा गया। निर्माण में इस्तेमाल हो रही ईंटें भी प्रथम श्रेणी की बजाय दोयम और पीले रंग की बताई जा रही हैं। सीमेंट और मोरंग का मिश्रण इतना कमजोर है कि कुछ ही दिनों में निर्माण की परतें उखड़ने लगी हैं।
इस पूरे मामले को लेकर पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अरशद सुल्तान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह योजना उनके कार्यकाल में स्वीकृत हुई थी और इसके लिए राज्य सरकार से लगभग 30 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। उद्देश्य साफ था कि जनता के पैसे का सही उपयोग हो और नगर को एक स्थायी सुविधा मिले, लेकिन वर्तमान में जिस स्तरहीन गुणवत्ता के साथ काम कराया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।
अरशद सुल्तान ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारी और नगर पंचायत के संबंधित लोग इस भ्रष्टाचार में बराबर के भागीदार नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभासदों के पास वित्तीय अधिकार नहीं होते, ऐसे में निर्माण कार्य की पूरी जवाबदेही अधिकारियों और नगर पंचायत प्रशासन की बनती है। यदि समय रहते गुणवत्ता में सुधार नहीं किया गया और भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लगी, तो वे नगर पंचायत गेट पर अनिश्चितकालीन धरना देने को मजबूर होंगे।
स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों ने भी इस मामले में गहरी नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि यदि 30 लाख रुपये जैसी भारी-भरकम लागत के बावजूद घटिया ईंटों और कमजोर निर्माण से विकास की बुनियाद रखी जाएगी, तो यह सौंदर्यीकरण कुछ ही महीनों में जमींदोज हो जाएगा। इससे न सिर्फ सरकारी धन का दुरुपयोग होगा, बल्कि जनता का भरोसा भी पूरी तरह टूट जाएगा।
यह मामला सिर्फ घटिया निर्माण का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं को लूट का जरिया बना देने वाली मानसिकता का है। यदि समय रहते जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो ऐसे भ्रष्टाचार को खुली छूट मिलती रहेगी। विकास तभी सार्थक होगा जब गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, वरना योजनाएं केवल फाइलों और घोटालों तक सिमट कर रह जाएंगी।




